Saharanpur News: जिले में बनेगा पहला औद्योगिक गलियारा, 13 गांव की ली जाएगी जमीन
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सहारनपुर। जिले में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के साथ अब औद्योगिक विकास की दिशा में एक और बड़ी सौगात मिलने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) जिले में पहला औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। प्रस्ताव के तहत जिले के 13 गांवों की करीब एक हजार हेक्टेयर भूमि पर लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक गलियारा विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में करीब 2000 करोड़ से अधिक निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए सदर तहसील के 11 और नकुड़ तहसील के दो गांवों की जमीन अधिग्रहीत करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्तावित भूमि में सदर तहसील के लाखनौर मुस्तकम, कोटा, सीड़की, उमाही, भलस्वा ईस्सापुर, वाजिदपुर सानी, कपासी, सूभरी महराब, सैदपुरा, लतीफपुर मुस्तकम और अलीपुरा गांव शामिल हैं। वहीं, नकुड़ तहसील के कुम्हारहेड़ा और सरगथवाला गांव की भूमि भी इस परियोजना में शामिल की गई है। इन क्षेत्रों का चयन मुख्य रूप से उनकी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
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प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, अंबाला-शामली फोरलेन और बेहट रोड के करीब होगा, जिससे माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को सुगमता मिल सकेगी।
यह परियोजना प्रदेश के 26 जिलों में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा विकास योजना का हिस्सा है, जिसे यूपीडा के माध्यम से विकसित किया जाना है। औद्योगिक गलियारा विकसित होने से जिले में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उद्योगों को नई गति मिलेगी। विशेष रूप से वुडकार्विंग उद्योग, धार्मिक पर्यटन और छोटे कारोबारों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।
- रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे
औद्योगिक गलियारे से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा, जिन किसानों की जमीन परियोजना में अधिग्रहीत होगी, उन्हें मुआवजे के रूप में आर्थिक लाभ भी मिलेगा। इसके अलावा औद्योगिक गलियारे के आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट और व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके लिए सदर तहसील के 11 और नकुड़ तहसील के दो गांवों की जमीन अधिग्रहीत करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्तावित भूमि में सदर तहसील के लाखनौर मुस्तकम, कोटा, सीड़की, उमाही, भलस्वा ईस्सापुर, वाजिदपुर सानी, कपासी, सूभरी महराब, सैदपुरा, लतीफपुर मुस्तकम और अलीपुरा गांव शामिल हैं। वहीं, नकुड़ तहसील के कुम्हारहेड़ा और सरगथवाला गांव की भूमि भी इस परियोजना में शामिल की गई है। इन क्षेत्रों का चयन मुख्य रूप से उनकी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
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प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, अंबाला-शामली फोरलेन और बेहट रोड के करीब होगा, जिससे माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को सुगमता मिल सकेगी।
यह परियोजना प्रदेश के 26 जिलों में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा विकास योजना का हिस्सा है, जिसे यूपीडा के माध्यम से विकसित किया जाना है। औद्योगिक गलियारा विकसित होने से जिले में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उद्योगों को नई गति मिलेगी। विशेष रूप से वुडकार्विंग उद्योग, धार्मिक पर्यटन और छोटे कारोबारों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।
- रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे
औद्योगिक गलियारे से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा, जिन किसानों की जमीन परियोजना में अधिग्रहीत होगी, उन्हें मुआवजे के रूप में आर्थिक लाभ भी मिलेगा। इसके अलावा औद्योगिक गलियारे के आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट और व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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Q: What will the new industrial corridor bring to Saharanpur?
It will bring job opportunities and business growth.
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